2026-02-03 14:58:24
गुरुग्राम। सूर्योदय से पूर्व पवित्र नदियों में स्नान से पुण्य कई गुना बढ़ जाता है, जो स्वास्थ्य, मोक्ष और पापों से मुक्ति दिलाने में सहायक है। यह महीना भगवान विष्णु और सूर्य देव की उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ है। भारत में प्रतिवर्ष माघ माह में प्रयागराज में त्रिवेणी के तट पर साधु ,संत, तपस्वी , सन्यासी आध्यात्मिक चेतना और आम लोगों को जागरूक करने के लिए कठोर तपस्या करते आ रहे हैं। दुनिया में भारतीय सनातन का वैभव और वर्चस्व आज भी कायम है । यदि दुनिया के लोग सनातन अपनाएंगे तो निश्चित रूप से उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने के लिए मिलेंगे। भारतीय सनातन संस्कृति आध्यात्मिक और मानसिक शांति का अनादी काल से सर्वमान्य संस्कृति है। भारत देश सहित दुनिया में सद्भाव सहित मानवीय एकता का निर्माण हो , विकृत मानसिकता के लोगों की बुद्धि शुद्ध हो। यह बात काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य नरेन्द्रानन्द महाराज ने पूर्णिमा के मौके पर पवित्र गंगा में स्नान करने के उपरांत कही । यह जानकारी निजी सचिव स्वामी बृजभूषणानन्द सरस्वती के द्वारा दी गई है ।
विदेशों से लोग आत्मिक शांति के लिए पहुंचते
शंकराचार्य नरेंद्रानंद महाराज ने कहा भारत में कुंभ और महाकुंभ का भी माघ माह के मेले के जैसा ही महत्व बना हुआ है । यही कारण है की कुंभ महाकुंभ से लेकर माघ माह में प्रयागराज में पूरी दुनिया से और विदेशों से लोग आत्मिक शांति के लिए पहुंचते हैं। माघ माह में पूर्णिमा के मौके पर गंगा में किया गया स्नान अमृत काल में किया गया स्नान माना गया है ब्रह्म मुहूर्त में किए गए गंगा स्नान को सिद्धि योग में किया गया स्नान भी माना गया है माघ माह की पूर्णिमा में जगत कल्याणकारी पवित्र गंगा में स्नान करने वाले व्यक्ति के जीवन में शांति स्वभाव का समावेश होता है कुंभ महाकुंभ हो या फिर माघ माह में प्रयागराज में कल्पव व साधना का समय इस मौके पर देवी देवता भी प्रत्यक्ष हो प्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहते हैं।
राष्ट्र की समृद्धि, सुरक्षा की कामना से संगम स्नान
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती महाराज ने आज माघ पूर्णिमा के पावन पर्व पर अनेक सिद्धियों को प्रदान करने वाले रवि पुष्य चतुष्ग्रही योग में राष्ट्र की समृद्धि एवम् सुरक्षा की कामना से संगम स्नान किया । इसी के साथ इस वर्ष का माघ मास का कल्पवास सम्पन्न हो गया । शंकराचार्य महाराज ने अपने सन्देश में कहा कि माता गंगा की कृपा से इस वर्ष का माघ मेला सकुशल संपन्न हुआ, इसके लिए व्यवस्था में लगे सभी अधिकारी और कर्मचारी बधाई के पात्र हैं । सभी सनातनधर्मी स्वस्थ रहें, और अगले वर्ष पुनः पधार कर संगम में पुण्य की डुबकी लगाकर अपने जीवन को धन्य करें । शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज अपने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के अभियान में झारखण्ड प्रस्थान कर गए । वहाँ से वापस अपने त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर में आकर शिवरात्रि पर सम्पन्न होने वाले अखण्ड महारूद्राभिषेक, शिव बारात एवम् भण्डारा के आयोजन में उपस्थित रहेंगे । शिवरात्रि के पश्चात् शिविर का समापन होगा ।