​रेवाड़ी नगर परिषद में महाघोटाला नियमों को दी तिलांजलि, फाइलों और रजिस्टरों का हुआ सफाया

भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक और काला सच सामने आया है
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2026-03-07 18:44:06

​रेवाड़ी। नगर परिषद में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक और काला सच सामने आया है। जो मीडिया की सुर्खियों में आ गया है। परिषद का कार्यकाल समाप्त होते ही अंधेर नगरी-चौपट राजा वाली स्थिति पैदा हो गई है। महज एक महीने के भीतर 4 बड़े निजी अस्पतालों और एक मॉल को बैकडोर एंट्री के जरिए गुपचुप तरीके से NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) बांट दिए गए। ​हैरानी की बात यह है कि ये वो संस्थान हैं जिनकी फाइलें नियमों की कमी के कारण सालों से धूल फांक रही थीं, लेकिन अधिकारियों ने विदाई से पहले खास मेहरबानी दिखाते हुए नियमों को ताख पर रख दिया।

​भ्रष्टाचार के नॉर्म्स: न नक्शा, न ID... फिर भी मिल गई NOC ​इस पूरे खेल में नियमों की ऐसी धज्जियां उड़ाई गई हैं कि सुनकर सिर चकरा जाए: ​अवैध को वैध का ठप्पा: जिन अस्पतालों के न नक्शे पास हैं और न ही प्रॉपर्टी आईडी बनी है, उन्हें भी क्लीन चिट दे दी गई। ​JE की रिपोर्ट को ठेंगा: एक मामले में तो जूनियर इंजीनियर (JE) ने लिखित में भवन को अस्वीकृत किया था, लेकिन भ्रष्टाचार के आगे उस रिपोर्ट की कोई वैल्यू नहीं रही। ​गायब हुआ रिकॉर्ड: धांधली को छिपाने के लिए नगर परिषद से डिस्पैच रजिस्टर ही गायब कर दिया गया है। 5 में से 3 संस्थानों की फाइलें दफ्तर से नदारद हैं।

​कटघरे में रसूखदार: ये हैं वो खास संस्थान ​नगर परिषद के सूत्रों के अनुसार, जनवरी से 14 फरवरी के बीच जिन संस्थानों पर मेहरबानी बरसी, उनमें शामिल हैं: ​मार्स अस्पताल (दिल्ली रोड) ​सावित्री अस्पताल (सर्कुलर रोड) ​सुपर प्राइम अस्पताल (मिनी बाईपास) ​निजी अस्पताल (मॉडल टाउन) ​एक बड़ा मॉल (बाईपास स्थित) ​मामला बेहद गंभीर है। एनओसी जारी करने में भारी अनियमितता बरती गई है। मैंने ईओ से जवाब मांगा है और जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई निश्चित है। > — ब्रह्मप्रकाश अहलावत, डीएमसी

​सस्पेंशन और तबादलों का दौर, फिर भी जारी है खेल ​भ्रष्टाचार की इस बहती गंगा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में JE हैप्पी और अकाउंटेंट जितेंद्र को सस्पेंड किया गया था, जबकि 16 फरवरी को ईओ सुशील भुक्कल का तबादला कर दिया गया। लेकिन तबादलों से पहले भ्रष्टाचार की यह फेयरवेल फाइल पूरी कर दी गई। प्रदूषण बोर्ड भी एक निजी अस्पताल को एनओसी देने के मामले में नोटिस थमा चुका है। ​बड़ा सवाल: क्या प्रशासन सिर्फ फाइलों की तलाश करेगा या उन चेहरों को भी बेनकाब करेगा जिन्होंने रेवाड़ी की जनता की सुरक्षा को ताख पर रखकर जेबें गर्म की हैं? आखिर बिना फाइलों और बिना रजिस्टर के यह जादुई एनओसी कैसे जारी हो गई ?

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